Sunday, April 5, 2020

एनेटे: कजि /प्राक्कथन

सोबेन को इसु पुर: जोहार!         (हिन्दी अनुवाद के लिए कॉमेंट में देखें)
विश्व रे 6000 भाषा को मेनागा. एनमे से रे अबु भारत दिशुम रे 780 (एया सै उपुन हिसि) जगर को मेनागा. ने ओते दिसुम रे ला-अ उतर पापूआ नीउ गुयना रे 839 भाषा को मेनागा एनायेते अबु भारत दिसुम लाअ जगर रे उमिया काना. भारत रेय: 780 जगर रे 22 (हिसि बर) (123 जगर को 22 मपरङ जगर रेय: अंतर्गत एंगा जगर लेका कना)  जगर को संविधान रेय: 8 (इरिलिय) अनुसुचि रे मपरङ जगर रेय: टयद् नमा कना. 147 (मोद् सै बरहिसि एया) जगर, जगर तन होड़ो को 10000 ते ला-अ् मेना कोवा ओड़ो: 510 जगर, जगर तनको 10000 ते कोम होड़ो गेयाको.  अबु मुण्डा जगर एंगा जगर तन कोव: लेनेका 2011 ईश्वी रेय: होड़ो लेनेका लेकाते 16,34,150 मेनागा, एनमेसे रे 11,28,228 मुण्डारी ओड़ो: 5,05,922 होड़ोको मुण्डा जगर मेनते एंगा जगर को ओल रिका केदा. भारत रे कुल मुण्डा आबादी 22,28,661 मेनागा, एनालेकाते 5,94,228 मुण्डाको एंगा जगर काको इतु तदा. ने कजि दो उड़ु: लेरे दुकूगे टोरो:वा.

ने सोमोय सहर को पसरव तनते ओड़ोः हातु रेनको सहर को सेनोः तनते अबु मुण्डा अद् आदिवासी जगर को रिड़िं इदियोः तना. नेया ब्लोग रेयः होराते अबु जगर के बनचव अद् हरा रेयः मियद्  जुलुन् तन्अ.

माइनसम जोहार!


'प्राक्कथन'
सभी को जोहार !
विश्व में 6000 (छः हजार) भाषाएँ बोली जाती हैं। इनमें से 780 भाषाएँ हमारे देश भारत में बोली जाती है। विश्व में सवार्धिक पापुआ न्यु गुवाना में 839 भाषाएँ हैं। भारत 780 भाषाओं के साथ विश्व का सवार्धिक भाषायी विविधता वाला द्वितीय देश है। भारत में 22 प्रमुख भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में रखा गया है। इसके अंतगर्त 147 मातृभाषाएँ बोली जाती हैं। 99 अन्य भाषाओं को 2011 की जनगणना में गैर अनुसूचित भाषाओं के अंतगर्त रखा गया है। इन 99 भाषाओं के अंतगर्त 147 बोलियों (मातृभाषाओं) को रखा गया है। जिसे बोलने वालों की संख्या 10,000 (दस हजार) से अधिक है। बाकी 510 (पाँच सौ दस) भाषाओं एवं बोलियों को जनगणना में विशेष भाषाओं के अंतगर्त रखा गया है। विशेष भाषाओं को बोलने वालों की संख्या 10,000 से कम है। हमारी मुण्डा/मुण्डारी भाषियों की संख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 16,34,150 है, जिसमें 11,28,228 लोग मुण्डारी और 5,05,922 लोगों ने अपनी मातृभाषा मुण्डा के रूप में दर्ज कराया था। भारत में मुण्डाओं की कुल जनसंख्या 22,28,661 है (2011 जनगणना)। अतः 5,94,511 मुण्डा अपनी मातृभाषा नहीं जानते। यह निश्चित रूप से मुण्डाओं के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता।

इस समय शहरों के विस्तार एवं गाँवो से मुण्डाओं के पलायन से एवं शिक्षा का माध्यम हिन्दी होने से भारत की मुण्डारी एवं अन्य आदिवासी भाषाओं का विलोपन हो रहा है। हमारी यह ब्लाग मुण्डा भाषा के संरक्षण एवं संवधर्न का एक प्रयास है।


References:
1. The Story Of Human Languages- Prof. John McWhorter
2. https://en.m.wikipedia.org/wiki/mundari_lallanguage
3. https://en.m.wikipedia.org/wiki/munda_people
4. Census Of India 2011

1 comment:

  1. 'प्राक्कथन'
    सभी को जोहार !
    विश्व में 6000 (छः हजार) भाषाएँ बोली जाती हैं। इनमें से 780 भाषाएँ हमारे देश भारत में बोली जाती है। विश्व में सवार्धिक पापुआ न्यु गुवाना में 839 भाषाएँ हैं। भारत 780 भाषाओं के साथ विश्व का सवार्धिक भाषायी विविधता वाला द्वितीय देश है। भारत में 22 प्रमुख भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में रखा गया है। इसके अंतगर्त 147 मातृभाषाएँ बोली जाती हैं। 99 अन्य भाषाओं को 2011 की जनगणना में गैर अनुसूचित भाषाओं के अंतगर्त रखा गया है। इन 99 भाषाओं के अंतगर्त 147 बोलियों (मातृभाषाओं) को रखा गया है। जिसे बोलने वालों की संख्या 10,000 (दस हजार) से अधिक है। बाकी 510 (पाँच सौ दस) भाषाओं एवं बोलियों को जनगणना में विशेष भाषाओं के अंतगर्त रखा गया है। विशेष भाषाओं को बोलने वालों की संख्या 10,000 से कम है। हमारी मुण्डा/मुण्डारी भाषियों की संख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 16,34,150 है, जिसमें 11,28,228 लोग मुण्डारी और 5,05,922 लोगों ने अपनी मातृभाषा मुण्डा के रूप में दर्ज कराया था। भारत में मुण्डाओं की कुल जनसंख्या 22,28,661 है (2011 जनगणना)। अतः 5,94,511 मुण्डा अपनी मातृभाषा नहीं जानते। यह निश्चित रूप से मुण्डाओं के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता।

    इस समय शहरों के विस्तार एवं गाँवो से मुण्डाओं के पलायन से एवं शिक्षा का माध्यम हिन्दी होने से भारत की मुण्डारी एवं अन्य आदिवासी भाषाओं का विलोपन हो रहा है। हमारी यह ब्लाग मुण्डा भाषा के संरक्षण एवं संवधर्न का एक प्रयास है।

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