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अहंकार की लहर से
कहर बरपाएगी धरती पर
छिन्न-भिन्न हो जाएगी आश्रय सारी।
गहरी नींद पर सोये सारे
जागो जग के सारे प्यारो
शांत करो चित को
गरम लोहे सा तपती मन को।
ईष्र्या क्रोध संभाल अपने को
मन का मैल दूर करो
प्रेम सागर सृजन कर मन में
सोचो हृदय से अपने में
क्या जो कर रहा हूँ सब ठीक।
संसार में गरिमा मिट न जाय
सरे कलंक धो डालो
प्यार सागर के जल रे।
मद्य पान है भयावह
क्रूर भाव पैदा करता मन में
अत्याचार का साथ दे जमकर
नित हत्याएँ होता निर्मम।
आ रहा तूफान भयंकर
सोच सारे जग के जन
क्या विषम स्थिति है हमपर
प्रार्थना करो नित नमन
हे अन्तर्यामी उद्धार करो हमारा
शीश झुकाते हैं सहस्त्रों नमः
उद्धार करो इस भयंकर तूफान से।
क्रूर स्थार्थी भाव हटा दो मन से
मिटा दो सारे मैल जन मन से
'औ’ हमें अहिंसा के राह ले चल
सत्य धर्म जीवन पथ पर
ज्योतिर्मय जीवन दे।

विशराम डोडराय
बालो, खूंटी
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