Wednesday, April 8, 2020

ओ...किनारों को छूकर दूर जाने वाले



ओ...किनारों को छूकर दूर जाने वाले
आँखों में उतरकर
आँसू बन झरने वाले
मनमीत, मन लुभाकर
पंक्षी उड़ जाने वाले,
क्या जानो अंतर्व्यथा
दर्पण में दिल देखने वाले,
ओ...किनारों को छूकर दूर जाने वाले।

अपनी कोमल छूवन दे
तटों पर इतराने वाले
नील-नीर बयार देख
सुंदरता को पीने वाले
अंतर की शीतलता क्या जानो
मुझे दूर से देखने वाले,
  ओ...किनारों को छूकर दूर जाने वाले।

दिल के चमन में कली खिलाकर
मालाकार को बेचने वाले
तितलियों संग गति कराकर
हार किसी को देने वाले
चमन की व्यथा क्या जानो
बहार ला, पतझड़ बुलाने वाले
ओ...किनारों को छूकर दूर जाने वाले।

द्वार पर दस्तक देकर
आंगन से लौटने वाले
चंदन-सी खूशबू लाकर
अभिनन्दन पूर्व जाने वाले
क्या जानो गृहस्वामी की व्यथा
अतिथ्य न स्वीकारने वाले
ओ...किनारों को छूकर दूर जाने वाले...
ओ...किनारों को छूकर दूर जाने वाले...|

सामु ढोडराय
Pic: https://fineartamerica.com/featured/beautiful-women-holding-flower-gull-g.html
Typing : Kisan Purty

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