Wednesday, July 29, 2020

हम भी तो दीये हैं - I

Samu Dhodray

हम भी तो दीये हैं

किसी के घर आंगन के

मद्धम होती आंखों के

हमें क्यों बुझा देते हो।


हम भी तो दीये हैं

किसी के जीवन भरने इंजोत 

जलने से पहले ही

हमें क्यों बुझा देते हो।


हम भी तो दीयें हैं

मंथर हवा के झोकों से

झुमते वक्त की लय में

क्या बिगाड़ा तुम्हारा जो

हमें बुझा देते हो।


हम भी तो दीये हैं

तुफानों से लड़कर 

आसमान को चीरकर

जलना चाहते हैं सितारों संग

उड़ानों से पहले

हमारे पर क्यों काट देते हो ?


हम भी तो दीये हैं

किसी के घर-आंगन के 

हमें क्यों बुझा देते हो ?

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