नृतत्वशात्रियों के अनुसार मुण्डा जाति प्रोटो ऑस्ट्रेलाॅयड मानव प्रजाति से संबंधित है। भारत के निवासियों को नृतत्ववेतावों ने छः मानव वंशों में बाँटा है .
1. निग्रिटो 2. प्रोटो ऑस्ट्रेलाॅयड 3. मंगोलाॅयड
4. भूमध्यसागरीय 5. ब्रेशीसिफाल्स 6. नाडिर्क
भारत की आदिवासी जातियाँ प्रथम तीन प्रजातियों से संबंधित हैं। मानव शात्रियों के अनुसार नीग्रिटो भारतीय उप महाद्धीप में अफ्रीका महाद्धीप से आने वाली प्रथम मानव समूह है। वतर्मान में इनकी संख्या बहुत कम है। केरल की इरूला, कादर, पुनियान नागालैंड की अंगामी नागा, झारखण्ड में राजमहल की पहाड़ियों की बागड़ी समूह, अंडामन-निकोबार द्धीप की सेन्टीनेल्स एवं ओंगे नीग्रिटो के अंश हैं।
नीग्रिटो के बाद भारत में प्रोटोआस्ट्रेलाॅयड का आगमन हुआ। भारतीय प्रायद्वीप की अधिकतर आदिवासी इसी मानव प्रजाति के वंश माने गये हैं। मुण्डा, हो, संथाल, उराॅव, खड़िया, कोल, भील, गोंड, कोरकू, असुर आदि प्राटोऑस्ट्रेलाॅयड मानव प्रजाति से संबंधित हैं। पुरा तत्ववेताओं का मानना है कि सिंधु घाटी सभ्यता का निमार्ण एवं विकास इन्हीं जनजातियों ने भूमध्यसागरीय प्रजातियों के साथ किया था। हड़प्पा मोहनजोदड़ो की खुदाई में प्रोटो ऑस्ट्रेलाॅयड की हड्डियों के अवशेष प्राप्त हुए हैं।
भारत के आदिवासियों का तृतीय समूह मंगोलाॅयड हैं| इनकी मुख्य भूमि चीन है। मंगोलाॅयड प्रजाति के लोग कश्मीर (लद्दाख) से सुदूर उत्तर पूर्व के राज्यों एवं पश्चिम बंगाल के पूर्वी भागों में निवास करते हैं। भारत में 2011 की जनगणना के अनुसार आदिवासियों के कुल संख्या 10,42,81,034 थी जो भारत की कुल आबादी का 8.6% है। भारत में सवार्धिक जनसंख्या भील जनजातियों की है| उसके बाद क्रमश गोंड, संताल, मीना, नाईक्डा, उराॅव, सांगली, मुण्डा, नागा, कोंड, बोरो, कोली महादेव, खासी, कोल आदि आबादी हैं। इस तरह मुण्डा जनजाति भारत की आठवीं सबसे अधिक आबादी वाली जनजाति है। 2011 की जनगणना के अनुसार इस जनजाति की कुल सुख्या 22,03,006 थी जिसमें 11,02,471 पुरूष एवं 11,00,535 महिला थे।
मण्डाओं का सवार्धिक आबादी झारखण्ड राज्य में बसती है। यहाँ 2011 की अनुसार 12,29,221 मुण्डा थे इसके बाद क्रमशः ओडिसा (5,58,691) एवं पश्चिम बंगाल में 3,66,386 जनसंख्या मुण्डाओं की थी। मुण्डाओं की मुख्य वसाहट राॅची, रामगढ़, खुॅटी, सिमडेगा और गुमला जिला में है। यहाँ खुँटी जिला में हसाः दाअ मुण्डारी मुण्डाओं की सवार्धिक शुद्ध मुण्डारी मानी जाती है। मुण्डारी भाषा की मुख्यतः चार शाखाएँ हैं। .
1. हसा दाअ मुण्डा
2. नागुरी मुण्डा
3. केरअः मुण्डा
4. तमाड़िया मुण्डा (लतर दिसुुुम मुुुुण्डा)
हसादअ: मुण्डा राँची चाईबासा रोड के पूूर्वी भाग में खॅूटी, पश्चिमी सिंहभूम एवं राँची जिला में बोली जाती है। नागुरी मुण्डा का क्षेत्र राँची चाईबासा रोड के पश्चिम में शंख नदी तक विस्तृत है। राँची और आस-पास में बोली जाने वाली मुण्डारी भाषा को केरअ: मुण्डा बोलते हैं। इसके अलावा एक अन्य शाखा भी है जिसे तमाड़िया मुण्डा कहा जाता है। इसे तमाड़ छेत्र में बोला जाता है। मुण्डा और मुण्डारी मातृभाषा बोलने वालों की संख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 16,34,150 है।
मुण्डाओं और सरकारों को निश्चित रूप से इस प्राचीन भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन का प्रयास करना चाहिए। जोहार!
reefences:
1. https://tribal.nic.in
2. Statistical project o scheduled tribes in india – 2013
3.https://www.jagranjosh.com@generalknowledge/racial-groups-of-ndia-14456550391
4. ems.gcgll.ac.in>article (pdf) Guha's 1931 racial classification of ndian tribes
5. Census report of ndia- 1931
6.www.yourarticlelibrary.com/population/population-of-major-tacial-group-in-india /19834 (Article by Smriti Chand)
7. होड़ो जगर सइति ओड़ो: सइति ओलहरिया को:- डा. मनसिद्ध बड़ायउद्
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