Tuesday, April 14, 2020

मुण्डा जाति एवं मुण्डा भाषा : भाग-2

Samu Dhodray 

पूरे एशिया में ऑस्ट्रोएसियाटिक परिवार की 150 भाषाएँ हैं। इसमें खमेर, मोन और वियतनामी भाषाएँ सबसे विकसित हैं जबकि बाकि भाषाँए क्षेत्रीय भाषाएँ हैं। भारत में आस्ट्रोएशियाटिक भाषाओं की दो उपशाखाएँ   हैं -
(1) मुण्डा भाषा परिवार        (2) खासी-प्लाउंगिक भाषा परिवार
मुण्डा भाषा परिवार की लगभग 23 बोलियाँ (भाषाएँ) हैं, जिसे  भारतीय प्रायद्वीप  के कई हिस्सों में बोला जाता है.  खासी-प्लाउंगिक भाषा परिवार की भाषाएँ मुख्यत: उत्तर-पूर्वी राज्यों के आदिवासियों द्वारा बोली जाती है.   मुण्डा भाषा परिवार  मुख्यतः दो उप शाखाओं में बाँटा गया है।
जो मुख्य रूप से निम्न प्रकार है.
                                

यद्यापि विद्धानों में ग्रुप विभाजन को लेकर मतभेद है।     

मुण्डा भाषा परिवार की भाषाओं को बोलने वालो की संख्या 1 करोड़ से अधिक है और मुण्डा भाषा बोलने वालों की संख्या 16 लाख से ज्यादा है। गोंडवाना भू-भाग में बसने वाली सभी प्रोटोआस्ट्रेलायड जातियाँ मुण्डा भाषा परिवार की भाषाएँ नहीं बोलते। 

भारत के बड़े आदिवासी ग्रुप भील द्वाप बोली जाने वाली भीली भाषा इण्डो- आयर्न भाषा परिवार से संबधित है वैसी ही गोंडी एवं कुडुख भाषाएँ द्रविड़ भाषा परिवार से है। इन भाषाओं के कई शब्द मुण्डा भाषा परिवार के शब्दों से मिलते हैं। विद्वानों के मतानुसार उन जातियों ने समायंतराल में उच्च भाषाओं के संपर्क में आने से उन्हीं उच्च भाषाओं को अपना लिए। वतर्मान में थी अधिकतर आदिवासी भाषाएँ विलोपन की ओर जा रही हैं। लगभग सभी राज्यों में प्राथमिक शिक्षा का माध्यम हिन्दी या उस राज्य का भाषा होने के कारण आदिवासी भाषाएँ आजादी के बाद हमेशा उपेक्षा का शिकार हुए है। शहरों को विकास एवं शहरों की ओर आदिवासियों का पलायन होने से भी लोग हिन्दी या अन्य विकसित भाषाओं को अपना रहे हैं तथा अपनी मातृभाषा का ज्ञान बच्चों को नहीं दे रहे हैं। इससे आने वाले समय में बहुत सी आदिवासी भाषाओं पर विलोपन का खतरा मंडरा रहा है.
संताली और भीली को छोड़कर आदिवासी भाषाएँ यूनेस्को की एन्डेन्जरड भाषाओं की लिस्ट में हैं। इसमें बड़े स्तर पर बोली जाने वाली गोंडी, कडुख, मुण्डारी और हो भी है। इस लिस्ट में भारत की कुल 197 भाषाओं को शामिल किया गया है -

भाषाओं की स्थिति            संख्या
विलुप्त                                5
गंभीर रूप् से संकटग्रस्ट        42
संकटग्रस्ट                            7
निश्चित रूप से संकटग्रस्त      62
संवेदनशील                         81    
कुल                                197 

    मुण्डारी भाषा, कुड़ुख, गोंडी, हो, सोरा, कोरकु, कोरवा, गुटाॅब, इरूला आदि भाषाओं के साथ संवेदनशील भाषाओं की सूची में है। इन भाषाओं का लिखित साहित्य का विकास के साथ प्राथमिक स्तर पर शिक्षण की व्यवस्था करना बहुत जरूरी है अन्यथा इसके विलोपन को रोकना मुश्किल हो जाएगा। उम्मीद है सरकारें इस दिशा में ठोस कदम उठायेंगी और भारत के लोग अपनी भाषायी और सांस्कृतिक विविधता कायम रखने में कामयाब होंगे।

    इन्हीं आशाओं के साथ सबको जोहार !

References:
1. http://sealang.net/munda
2. https://www.britannica.com/topic/munda-languages
3.https://www.britannica.com/topic/austroasiatic-languages
4.https://livingtongues.org/project/asia/india/munda-languages project
5.http://unesco.org/languages-atlas/index.php

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