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| Story By: Anjali Horo |
कई सौ साल पहले की बात है, राँची के आस-पास कोई महामारी फैली हुई थी। हुलहुण्डु गाँव में भी अफरा-तफरी का महौल था लोग अपने और अपने लोगों को बचाने का हर जतन प्रयास कर रहे थे और विकल्प तलाश रहे थे। तब हुलहुण्डु का टोंया मुण्डा खुद को और परिवार को उस महामारी से बचाने के
लिए दक्षिण की ओर चला गया। उसे तजना नदी के किनारे, घने जंगल के बीच एक जगह पसंद आ गई। उन्होंने बडे़ भाई के परिवार को भी बुला लिया।
लिए दक्षिण की ओर चला गया। उसे तजना नदी के किनारे, घने जंगल के बीच एक जगह पसंद आ गई। उन्होंने बडे़ भाई के परिवार को भी बुला लिया।
दोनों भाईयों ने मिलकर जंगल, साफ किया और खेती के लिए जमीन बनाए। उन्होंने हुललुण्डु गाँव छोड़कर एक अलग गाँव बसाया। सर्वप्रथम टोंया मुण्डा ने इस गाँव को बसाया था इसलिए इसका नाम - टोंया टोला पड़ा। समय के साथ दोनों भाईयों का परिवार बड़ा होकर छोटे परिवारों में बाँटता गया और आज लगभग 60 परिवार हो गये। राँची-खूँटी मार्ग पर बसे मेरे गाँव में अब दूसरे गाँवों के लोग भी बस रहे हैं इससे गाँव का स्वरूप् बदल रहा है।
अब जंगल साफ हो चुके हैं लेकिन तजना अब भी वैसे ही बहती है, हमें जीवन की दिलासा देती है जैसे सैकड़ों सालों से हमारे दादा-दादी, परदादा-परदादी लोगों को देते आयी है। आने वाले समय में शायद गाँव का स्वरूप बहुत बदल जाए पर टोंया टोला का नाम टोंया मुण्डा के नाम से बसा है यह कभी नहीं बदलेगा।
(जैसा कि मेरी माँ ने मुझे बताया)
अंजली होरो
खूँटी
Typed by: Kisan Purty
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